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भगवान के सामने भूलकर भी इस तरह न बैठें, वरना तरस जाएंगे पाई-पाई को, उम्र भी होने लगेगी कम!

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 किसी भी देवी-देवता की पूजा करते समय कुछ बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए वरना आपको पूजा का फल नहीं मिलेगा। तो ज्योतिषि चिराग बेजान दारूवाला से जानिए कि भगवान के सामने किस तरह नहीं बैठना चाहिए।  हिंदू धार्मिक मान्यताओं से जुड़े कई रीति-रिवाज और नियम हैं, जो व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालते हैं। हमारी पीढ़ियां सदियों से इन नियमों का पालन करती आ रही हैं। इनमें से कई नियम जीवन को सही तरीके से जीने का आचरण सिखाते हैं और यही जीवन को सार्थक बनाते हैं। हमारे बीच कई ऐसी धार्मिक मान्यताएं हैं, जैसे रात में झाड़ू नहीं लगाना चाहिए, सोना मिलना और खोना दोनों को अपशकुन मानना, गर्भवती महिलाओं को नदी पार नहीं करना चाहिए, शाम के समय दरवाजे पर नहीं बैठना चाहिए। बाएं हाथ से खाना खाएं। कई आदतें धार्मिक आस्था से जुड़ी होती हैं। इन्हीं में से एक है क्रॉस लेग करके बैठना। आइए एस्ट्रोलॉजर चिराग बेजान दारूवाला से जानते हैं कि भगवान के सामने पैर फैलाकर बैठने से क्या होता है। भगवान के आगे पैर फैलाकर बैठने से क्या होता है? शास्त्रों के अनुसार, भगवान के सामने पैर फैलाकर बैठने से या पैर फैलाकर ...

भगवान श्रीकृष्ण ने दिए पर्यावरण मंत्री तेज प्रताप यादव को सपने में दर्शन, ट्वीट करके कही ये बात

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  बिहार के पर्यावरण मंत्री तेजप्रताप यादव अपने बयानों की वजह से काफी ज्यादा चर्चा में रहते है. अब उनके एक नए ट्वीट ने लोगों को हैरत में डाल है. दरअसल, उन्होंने ट्वीट करके बताया है कि भगवान वासुदेव उनके सपने में आए थे.  बिहार के पर्यावरण मंत्री तेजप्रताप यादव अपने बयानों की वजह से काफी ज्यादा चर्चा में रहते है. अब उनके एक नए ट्वीट ने लोगों को हैरत में डाल है. दरअसल, उन्होंने ट्वीट करके बताया है कि भगवान वासुदेव उनके सपने में आए थे. इससे पहले उन्हें सपने में सपा के दिवंगत नेता मुलायम सिंह यादव दिखे थे. इस सपने को आने के बाद तेज प्रताप साइकिल चलाकर ऑफिस गए थे   पर्यावरण मंत्री तेजप्रताप यादव ने ट्वीट में कही थी ये बात  रात 1 बजकर 31 मिनट को पर्यावरण मंत्री तेजप्रताप यादव ने ट्वीट किया था. अपने इस ट्वीट में उन्होंने लिखा था, 'विश्व रूप दर्शन योग मैं मुकुट से सुशोभित चक्र और गदा से सुसज्जित शस्त्रों के साथ सर्वत्र दीप्तिमान लोक के रूप में आपके रूप को देख रहा हूँ। इस चमचमाती अग्नि में आपके तेज को देख पाना कठिन है जो सभी दिशाओं से प्रस्फुटित होने वाले सूर्य के प्...

वैशाख की अष्टमी को होती है काल भैरव की पूजा, जानिए वैशाख कालाअष्टमी की तिथि और मुहूर्त

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 हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है. कालाष्टमी को भोलेनाथ के रौद्र रूप काल भैरव की पूजा की जाती है. मान्यता है काल भैरव की पूजा से जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं   हर माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है. कालाष्टमी को भोलेनाथ के रौद्र रूप काल भैरव  की पूजा की जाती है. मान्यता है कि काल भैरव की पूजा से जीवन से सभी प्रकार के कष्टों का निवारण हो जाता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है. कालाष्टमी का शिव भक्त विशेष रूप से भगवान भैरव के मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं. आइए जानते हैं वैशाख माह की कालाष्टमी कब है 2025) और इस दिन क्या करना चाहिए कब है वैशाख कालाष्टमी इस वर्ष वैशाख माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 20 अप्रैल रविवार को रात 7 बजकर 1 मिनट पर शुरू होगी और 21 अप्रैल सोमवार को शाम 6 बजकर 58 मिनट तक रहेगी. वैशाख कालाष्टमी का व्रत 21 अप्रैल सोमवार को रखा जाएगा.   कालाष्टमी को क्या करना चाहिए कालाष्टमी को भगवान शंकर के काल भैरव रूप की पूजा की जाती है. इस दिन काल भैरव की पूजा के साथ साथ कुछ ...

कब है वरूथिनी एकादशी, जानिए वैशाख माह में रखे जाने वाले इस व्रत की पूजा विधि और महत्व

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वैशाख माह में इस दिन रखा जाएगा वरुथिनी एकादशी का व्रत. इस तरह पूरे मनोभाव से की जा सकती है भगवान विष्णु की पूजा. यहां पढ़ें  पूजा विधि.     हिंदू धर्म में एकादशी की अत्यधिक मान्यता होती है. माना जाता है कि एकादशी पर पूरे मनोभाव से भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा संपन्न करने पर पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में खुशहाली आती है. वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है. वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने पर कष्टों से मुक्ति मिलती है, पाप कट जाते हैं और मान्यतानुसार भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है. ऐसे में यहां जानिए अप्रैल में किस दिन रखा जाएगा वरुथिनी एकादशी का व्रत  कैसे होगी पूजा संपन्न, किन मंत्रों का जाप करना है शुभ और कब किया जा सकेगा व्रत का पारण   वरुथिनी एकादशी कब है  पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 23 अप्रैल, बुधवार की शाम 4 बजकर 43 मिनट पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन अगले दिन 24 अप्रैल, गुरुवार की दोपहर 2 बजकर 32 मिनट पर हो जाएगा. उदया तिथि के अन...